upsc/civil सिविल सर्विस एग्जाम में हिन्दी मीडियम का रिजल्ट क्यो ख़राब होता है ?
दोस्तों अपने कई बार न्यूज़ पेपर टेलिविजन समाचार में इंडरनेट पर या दूसरे सोशल मीडया पर यह सुना होगा की सिविल सेवा(civil service) एग्जाम में हिन्दी मीडियम छात्रों का प्र्दशन फिर ख़राब रहा या फिर 'हिंदी मीडियम' वाले पास नहीं कर पा रहे UPSC के एग्जाम अब आप 2020-21 का Result ही देखले जहा 761 उम्मीदवारों कि सूची में मुश्किल से 8-10 ही हिंदी मीडियम उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम में अपनी जगह बनाई। अब निश्चित रूप से इस रिजल्ट को अच्छा नहीं कहा जा सकता है.
ऐसा कई वर्षों से देखा जा रहा है यूपीएससी की परीक्षा में हिंदी माध्यम के छात्रों की सफलता का अनुपात लगातार गिरता जारहा है जो बहुत निराशाजनक और चिंता का विषय है। की किसी भी देश का भविष्य उसकी राष्ट्रभाषा निश्चित करती है और यदि उस भाषा को बोलने वाले लोग ही देश की सर्वोच्च सेवा में नहीं होंगे तो जाहिर है कि भविष्य के संकेत अच्छे नहीं है।
अब सबाल यह उठता है की क्या हिंदी माध्यम के छात्र अपने ही देस के सबसे प्रतिष्ठित सेवा के लायक नहीं है? आखिर ऐसा क्या कारण है कि UPSC Exam में हिंदी मीडियम वाले कैंडीडेट पीछे छूटते जा रहे। किन कारणों से हिंदी माध्यम के छात्र 2020-21 के Result में किसी भी उम्मीदवार ने टॉप 100 की लिस्ट में अपनी जगह नहीं बनाई है आज हम उन्ही विषय पर बात करेंगे और उन उसे दूर करने के उपाय ढूंढ़ और कैसे उस उस कठिनई को दूर कर के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते है।
UPSC Exam में हिंदी माध्यम रिजल्ट किन कारणों से ख़राब होता है यह जान्ने के लिए हम इसे बेसिक से समझने की कोसिस करते है। सबसे पहले हम इसका थोड़ा सा इतिहास जान लेते है।
ऐसा है कि अगर हम बात करे upsc के इतिहास कि तो 1977 -78 या 1997 से पहले upsc में हिंदी मध्यम कि कोई चीज थी ही नहीं सिविल सेवा तो हमारे देश में अंग्रेजो के आने से शुरू हुआ और उन्होंने ही इसकी रूप रेखा तय किया इसलिए यह केबल अँग्रेज़ी माध्यम में होती थी। जब 1977 में इंद्रा गाँधी के शासन के बाद जब जनता पाटी की सरकार आई जिसके प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई बने और यह कुल चार पार्टी के सम्मेलन से बनी सरकार थी।
इस पार्टी मेम्ब्रो का यह मानना था की हम देशी लोग है ग्रामीण समाज को समझते है इस लिए हम हिंदी और बाकि माध्यम में upsc एग्जाम करायेगे तो यही से हिंदी माध्यम शुरू होगया।
अब जब upsc एग्जाम हिंदी माध्यम में होने लगा लेकिन शुरू होने के 3 या 4 तक तो हिंदी माध्यम का रिजल्ट कभी हुआ ही नहीं। फिर 1990 बाद से एक्का दुक्का रिजल्ट होना चलु हुआ पर इसे ना के बराबर मानाजाता था और रेंक भी अच्छे नहीं होते थे। ऐसा कई वर्षो तक चलता रहा।
फिर हुआ यह कि वर्ष 1979 में जनता पार्टी की सरकार ने एक आयोग स्थापित किया जिसका नाम था मंडल आयोग इस आयोग का कार्य क्षेत्र सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ों की पहचान कराना था। और आर्थिक मापदंडो के आधार पर पिछड़ों वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। मंडल कमीशन लागु होने के कुछ वर्षो बाद तकरीबन 1993 यह नियम upsc में भी लागु हो गया कानून यह बना की upsc में OBC के लिए 27% आरक्षण दिया जाये।
जब UPSC में पिछड़ों वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया और इसमें सबसे जायदा आरक्षण OBC को मिला हुआ था। चुकी OBC वर्ग के लोग ज्यादा तर गाँव और कस्बो में रहते है और उनकी अंग्रेजी अच्छी नहीं होती है इसी और उनके लिए हिन्दी के सिवा दूसरा विल्कप था नहीं और वह हिन्दी को अच्छे से समझते भी थे इन्ही वजह से हिंदी माधियम का रिजल्ट काफी अच्छा होने लगा। फिर इसके बाद हर वर्ष रिजल्ट अच्छा होता रहा। वर्ष 2000 में पहली बार कुछ छत्रो का रेंक 6 और 7 आया जिनमे एक नाम मंजू राजपाल जो राजस्थान की रहने वाली है मंजू राजपाल का रेंक 6 है और दूसरा उमीदवार Diwakar Nath Mishra है जिनका रेंक 7 था।
2002 में फिर ऐसा हुआ जिसमे 5
रेंक 8 रेंक और 10 वा रेंक यह तीनो रेंक आगये।
2002 का रिजल्ट इतना शानदार था की पहले
100 में 20 से 25 लोग आगए एक ही वर्ष में।
2008 में फिर एक जम्प लगा जिसमे हिन्दी माध्यम के छात्र का रेंक ३ रहा जो अब तक का सबसे शानदार रेंक माना जाता है। 3 रेंक जिन का आया उनका नाम है किरण कौशल जो छत्तीसगढ़ में एसडीएम थी।
2008 के बाद से हिन्दी माधियम का रिजल्ट थोड़ा ख़राब होने लगा क्यो की UPSC ने 2008 के बाद से UPSC एग्जाम के पैटर्न में कुछ रिफ़ार्म करना शुरू किया और 2014 तक रिफ़ार्म करने का सिलसिला चलता रहा। जिसका परिणाम यह हुआ की हिन्दी मध्यम का रिजल्ट ख़राब होने लगा।
रिफ़ार्म किन किन कारणों के लिये किये गए थे ?
रिफ़ार्म करने का पहला उपदेश यह था कि कोई UPSC उम्मीदवार केबल सेलेब्स रट कर या याद करके IAS नहीं बन सकता यदि आप IAS बन्ना चहते है तो आपको दिमाग अप्लाई करने के लिए आना चाहिये इन्ही बातो के मद्देनजर UPSC के प्रमुख डी॰ पी॰ अग्रवाल ने यह निर्णय लिया की मुख्य परीक्षा कि प्रकृति को बदला जाये क्यो कि पहले यह होता था कि आप बहुत रेट के या याद करे काम चला सकते थे। रिफ़ार्म में किया यह गया कि सभी प्रश्नो को Difficult किया जाये कम option वाले प्रश्न दिए जाय एक प्रश्नो को तीन तीन हिस्से करना तीनो को अनिवार्य कर दिए गये। जीस्का का परिणाम यह हुआ कि 2008 और 2010 में लगभग सभी वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम चेंज होग्या। पाठ्यक्रम बदलने से हुआ यह की जो छात्र 3 वर्ष से पाठ्यक्रम को रट रहे थे वैसे छात्रों के लिए जगह बची ही नहीं और जो छत्र पढ़ने वाले थे उनके लिए रास्ता आसान हो गया था।
इसी तरह UPSC के सभी एग्जामो रिफ़ार्म किये गये जैसे
मंस में रिफॉर्म
2013 में सबसे बरा रिफॉर्म हुआ mains मंस के अस्तर पर। 2011 पहली बार CSAT को introduce क्या और CSAT के नंबर जोड़ने शुरू किया। जब CSAT आया तो शुरू के 3 वर्ष तक CSAT के नंबर जोड़े जाते थे 200 नंबर CSAT और 200 नंबर GS के होते थे।
2013 में जो mains मेंस में बदलाव किया वह यह था की GS को 600 नंबर से बढ़ा कर 1000 नंबर का किया गया और जो ऑप्शनल सब्जेक्ट पहले 2 होता 1200 नंबर के उसे घटा कर 500 का किया गया। निबंध जो था जिसे Essay कहते है उसे 200 से बढ़ा कर 250 का किया गया.और इंटरव्यू को 300 से घटा कर 275 किया गया.इन सब बदलाव के बावजूद जो सबसे बड़ा बदलाव किया गया वह यह था की mains में हिन्दी और इंग्लिश जो क्वालीफाई पेपर थे इन दोनों में किया यह की इंग्लिश पेपर के नंबरे तो जुटेंगे लकिन हिन्दी के नहीं इस बात को लेकर लोगो में बहुत आक्रोश देखने को मिला जिस कारण यह नियम हटाया गया।
जैसा की हमें पता है की CSAT qualified होता है इसमें कुल 200 नंबर में से 67 mark लाने होने है। और रही बात gs की तो gs में
200 में से 92 mark लाने होते है। अब सबाल यह है की अधिकतर हिंदी मीडियम के छात्र prelims qualified
क्यों नहीं कर पाते है इस का एक कारण यह है की upsc बोर्ड मेंबर यह चहते है की ias ऐसे छात्र बने जिसका मैथ और रीजनिंग अच्छी हो इस के लिये वह करते यह है की हर बार वह CSAT का लेबल थोड़ा सा बढ़ा देते है।
अगर हम बात करे 2012 से पहले होने वालेprelims की पहले comprehension में होता यह है की एक निबंध होता था इस निबंध से 2 या 3 प्र्शन आते थे लकिन अब क्या होता है की एक निबंध होता है 100 या 150 वर्ड का और इसमें से 1 प्र्शन पूछते है।यह निबंध इतना घुमावदार और पेचीदा होता है छात्र बहुत मुश्किल से निबंध पढ़ पते है और तो और इंग्लिश से हिन्दी में transliteration किया हुआ होता है जिसकरण भाषा को लेकर दिक्क्त होती है यही कारण है कि हिन्दी मीडियम के
छात्रों की मुश्किल और बढ़ जाती है। अपने मुश्क्लि से एक निबंध पढ़ा 1प्र्शन हल हुआ अब आप दूसरा निबंध पढ़ेगे उस समय दमाग इतना थक जाता है वह लगातार काम नहीं कर पता है। जिसका परिणाम यह होता है एक qustion जिसे आप सही कर सकते थे परन्तु गलत कर दिय इस तरह 1 या 2 प्र्शन तो गलत हो ही जाते है। अब एक या दो प्रश्न गलत करके आप CSAT qualified नहीं कर सकते।पर यदि आपका रीजनिंग और मैथ में अच्छी पकड़ है तो आप इस छती की भरपाई आसानी से कर सकते है।
हिन्दी मीडियम का रिजल्ट क्यो ख़राब होता है?
हिन्दी मीडियम का रिजल्ट ख़राब होने का जो दूसरा प्रमुख कारण है वह है answer writing skills . (A . W . S )
अब आपके मन में यह प्रश्न आता होगा की क्या होती है answer
writing skills.
आंसर राइटिंग स्किल्स का मतलब होता है लिखने की कला।
answer writing
skills की जो पहली समयशा है वह है स्पीड की समयशा यानि राइटिंग स्पीड कैसी है.
आय हम अंशार राइटिंग स्किल्सको थोड़ा विस्तार में समझते है।
सबसे पहले हम बात करते है GS पेपर की क्यो की answer writing skills कि जो समश्या उतपन होती है इसी पेपर में होती है और थोड़ी बहुत optional में भी होती है।
जैसा कि हमे मालूम है कि upsc exam में mains के कुल चार पेपर होते है इन चारो में सबसे पहला पेपर GS का पेपर देना होता है। अब GS में कुल 20 प्रश्न होते है यानि एक पेपर है 20 प्र्शन है और कुल समय अवधी 3 घंटे कि होती है अर्थात 3 घंटे में आपो 20 प्रशनो के उत्तर लिखने होते है.अगर इसे आसान भाषा में समझ जय तो 20 प्रशनो के लिए कुल 180 मिनट जिसका सीधा सा मतलब यह है कि 9 मिनट में 1 question का जबाब आपको लिख देना है
वहभी 200 शब्द में अब सम्स्या यह होती है की 3 घंटे में आप सिर्फ लिखते तो है नहीं आपको question पढ़ना भी होता है और कुछ सोचना भी परता है। तो हम यह मान लेते है की 9 मिनट में से 1 मिनट और कम गया अब आपके पास 8 मिनटयदि अपने 8 मिनट में 200 शब्द सिख लेते है आप सारे प्रश्नो का उत्तेर लिख सकते है।
चुकी आप हिंदी मेडियम से परीक्षा दे रहे है तो आपको अंसार भी हिन्दी में लिखना होता।और हिन्दी को लेकर जो upsc का गाइडलाइन्स है उसके मुताबिक आपको हर शब्द में शिरोरेखा(वर्णों के ऊपर लगाई जाने वाली रेखा) लगाना जरुरी है जिस कारण आपकी लिखने की गति धीमी पर जाती है।यही वह कारण है कि जिनके वजह से अक्शर छात्रों का एक या दो सवाल छूट जाता है।यही कारण है कि हर वर्ष आपको यह सुन्नी को मिलता है की हिन्दी माध्यम का रिजल्ट खराब होता है।
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