नो फ्लाई जोन क्या है?
पिछले महीने जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तब से जिन बातो की चर्चा जोड़ा पर है नो फ्लाई जोन उनमे से का एक है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से ही यूक्रेनी राष्टपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की नो फ्लाई जोन घोसित करने की मांग कर रहे है।
उनकी मांग है की यक्रेन के एयर स्पेस को नाटो और अमेरिका नो फ्लाई जोन घोसित करे ताकि रूसी विमान यक्रेन दाखिल नहीं हो सके। यक्रेन के जपोरिजिया न्यूक्लियर पॉवर प्लांट पर रूसी सेना के मद्दे नजर राष्टपति ज़ेलेंस्की ने
नो फ्लाई जोन स्थापित करने पर विचर करने पर कहा था। उनका कहना था की नागरिको की सुरक्षा और परमाणु दुर्घटना को रोकने के लिए ऐसा जरूरी है। लेकिन नाटो और अमेरिका ने यूक्रेन की इस मांग को ठुकरा दिया है।
नो फ्लाई जोन का क्या मतलब होता है।
आसान भाषा में कहे तो नो फ्लाई जोन उस खास इलाके को कहते है जहा अनधिकृत विमानों को उड़ान भरने की इजाजत नहीं होती आम तोर पर यह इलाका सैन्य ताकते तय करती है यूद्ध या संकट के समय ऐसे जोन बनाये जाते है। इसके अलावा नो फ्लाई जोन का इस्तेमाल संवेदनशील इलाको की सुरक्षा के लिए किया जाता है जैसे की साही निवास स्थल या खेल आयजन स्थल आदि जगह इसके शामिल है।
हला की आम तौर पर अस्थाई रूस से इसको लागु किया जाता है। सेना के संदर्व में नो फ्लाई जोन का मतलब होता है की उस क्षेत्र में एक भी विमान नहीं जा सकता ताकि किसी हमले या जासूसी को रूका जा सके अगर ऐसे जोन में कोई दूसरा विमान घुसता है तो उसे जबरदस्ती निचे उतरलिया जाता है या फिर उसे मार गिराया जाता है।
यक्रेन के राष्टपति के मांग के मताबिक नो फ्लाई जोन लागु करने का मतलब यह होगा की नाटो की सेना को अगर उस हवाई छेत्र में रूस का कोई भी विमान नजर आता है तो वह उसे सीधे निशाना बनायेगे और अगर जरूरत परी तो उसे नस्ट भी कर सकेंगे। लेकिन नाटो ने यूक्रेन की इस मांग को ठुकरा दी है।
दुन्या भर में अब तक कब कब नो फ्लाई जोन घोसित किया गया है।
1991 में खारी यूद्ध के बाद 1992 में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने ईराक के दक्ष्णि और उत्तरी हिस्से को नो फ्लाई जोन घोसित किया था इसका मकसद देश के विद्रोहियों छेत्रो को तत्कालीन राष्टपति सद्दाम हुसैन की सरकार द्वारा हवाई हमले से बचाना था।
2003 में ईराक पर अमेरिकी हवाई हमले तक यह लागु रहा था। 1990 के दशक में ही नाटो की वायु सेना ने बोसिन्या और हर्जेगोविना में नो फ्लाई जोन लागु किया था। एक लम्बे समय के बाद बोसिन्या को यूगोस्लाविया से 1992 में आजादी मिली थी तब बोसिन्या सर्बलों से देश के हवाई हमले से बचाने के लिए 1993 से 1995 के बिच वहा नो फ्लाई लागु किया गया था।
सयुक्त राष्ट सुरक्षा परिसद ने 1993 में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमे सदस्य देश को बोसिन्या हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया था।
2011 में लीबिया में लागु हुआ था नो फ्लाई जोन
तीसरा मौका 2011 में आया जब लीबिया में लम्बे समय तक सस्ता में रहे मुअम्मर गदाफी के खिलाफ विद्रोह छिड़ गया और संयुक्त राष्ट सुरक्षा परिसद ने लीबिया में उड़ान पर प्रतिबंध लगाने की अपील करते हुए एक प्रस्वाव पारित किया तब नाटो ने लीबिया सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर अत्याचार की असंका के बिच एक नो फ्लाई जोन स्थापित किया था। नाटो के दखल ने लीबिया के विद्रहियो की काफी मदद की और गद्दाफी सत्ता से बेदखल हो गए।
अमेरिका या नाटो ने यूक्रेन में नो फ्लाई जोन स्थापित क्यो कर दिया है।
अभी जो हालत यूक्रेन में बने हुए है उनमे वहा वे नो फ्लाई जोन लागु करने का मतलब है रूस से सीधा टकराव अगर नाटो यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित करता है तो उसे निगरानी के लिए अपने फाईटर जेट यूक्रेन के ऊपर उड़ाने होंगे इस दौरान नाटो का सीधा सामना रूसी विमानों और हेलीकप्टरों से होगा।
उधर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने चेताबनी दी है की अगर कोई तीसरा देश इस यूद्ध में कूदा तो इसे सीधे सीधे संघर्ष में भागी के तौर लिया जायेगा और रूस उसके खिलाप भी कार्यबाही करेगा यही वजह है की बाइडन प्रसासन समित नाटो के तमाम नेता यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित से साफ इंकार कर रहे है।
क्या नाटो देश रूस से डरे गये है ?
नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलेनबर्ग के मुताबिक अगर नो फ्लाई जोन लागु किया गया तो इस्से रूस के साथ नाटो देशो का सीधा संघर्ष शुरू होजायेगा अगर नाटो रूसी एयर क्राप्ट और हत्यारो को निशाना बनती है तो इस्से यूद्ध के और भीषण होने की असंका बढ़ जाएगी।
नाटो के मुताबिक नो फ्लाई जोन की सिर्फ घोसना नहीं होती बल्कि उसके लिए बड़ी तैयारियां करनी प्रति है। ऐसा करने पर एक संपूर्ण संघर्ष की अपील होगी जिसमे कई दूसरे देश भी शामिल होंगे और इस्से होने वाली मानव त्रासदी बहुत भयानक होगी।
नाटो और पश्च्मिी देशो का यह भी मन्ना है की रूस और नाटो दोनों ही परमाणु शक्तिया है अगर दोनों आमने सामने होते है तो प्रमाणु हमला होने का खतरा भी बढ़ सकता है और वह ऐसा नहीं चाहते है। यही वजह है की पस्चमी देश एक बाद एक रूस पर आर्थिक पावंदी तो लगा रहे है लेकिन नो फ्लाई जोन लागु करने से प्रहेज कर रहे है।
यूक्रेन ने नो फ्लाई जोन लागु करने के लिए नाटो या अमेरिका से आग्राह क्यो कर रहा है ?
कहि भी नो फ्लाई जोन लागु करना उस देश की राष्टीये संप्रभुता के सिंद्धांत का उलंघन करने जैसा है। ऐसा करना तब संप्रभुता का उलंघन नहीं होगा जब उस देश की सरकार ऑपचारिक रूप से इस्से सहमत हो जैसा की अभी यूक्रेन खुद अपने ही देश में नो फ्लाई जोन स्थापित करना चाहता है। तब इस हालत में उसकी संप्रभुता का उलंघन नहीं माना जायेगा।
2011 में जब नाटो ने लीबिया में नो फ्लाई जोन लागु किया था तब यह लीबिया की संप्रभुता का उलंघन करने जैसा था क्योकि ऐसा लीबिया के सरकार के मर्जी के खिलाप किया गया था। इस्से पता चलता है की जब इस तरह की गतिविधियों अंजाम देना हो तो यह तभी मुमकिन है जब कोई बड़ी शक्ति ऐसा करे। बात चाहे ईराक की हो या लीबिया इन सभी में नो फ्लाई जोन लागु करने में अमेरिका और नाटो जैसी शक्तियो का ही हाथ था कहने का मतलब यह है की जब यह नो फ्लाई जोन लागु करना हो तो यह काम केवल कुछ बड़ी शक्तिया या एक या एक से अधिक शक्तिया के जरिये किया जाता है।
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