kareva kya hai? करेवा क्या है

 करेवा क्या है 

करेवा शब्द कश्मीरी बोली से लिया गया है जिसका अर्थ है ,ऊँचा पठार (Elevated Table-land). इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले गॉडविन-ऑस्टिन (1859) और बाद में लिडेकर (1878) द्वारा किया गया था। यह पठार 13000 -18000 मीटर ऊंचाई पर अवस्थित होते है। 

करेवा अत्यधिक उपजऊ जलोढ़ मिट्टी और बलवा पत्थर जैसे अन्य तलछट से बने होते है। यह केसर, बादाम, सेब,और अन्य नकदी फसलों की खेती के लिए आदर्श होता है। 

 

करेवा का  महत्व। 

👅 कश्मीरी केसर की खेती करेवाओ पर ही की जाती है। 

👅कश्मीरी केसर को 2020 में जिआई टैग प्राप्त हुआ था। 

👅 यह अपने गहरे लाल रंग उच्च सुगंध और कड़वे स्वाद के लिए मशहूर है। 

👅 करेवा तलछट कई मानव सभ्यताओ और बस्तियो के जीवाश्म और अवशेषों को समेटे हुए है। 

👅 घाटी में करेवाओ को सबसे उपजाओ स्थान माना जाता है। 

करेवा मिट्टी का निर्माण कैसे हुआ। 

★माना जाता है की इन करेवाओ की उर्वरता, इनके गठन के लंबे इतिहास का परिणाम है। 

★ यह प्लेस्टोनियम काल (pleistocene period) (2.6 मिलियन वर्ष से 11,700 वर्ष पूर्व ) के दौरान बने थे। 

★ पीर पंजाब रेंज ने इस क्षेत्र में प्राकृतिक जल निकासी को अवरूध्द कर दिया और 500 वर्ग किमी में फैली एक झील का निर्माण हुआ। 

★ अगली कुछ शताब्दियों में इसका जल कम हो गया और पहारो के बीचो बिच झील सूखने से करेवा बन गए। 


करेवा के लिए संकट। 

👅 अपने कृषि और पूरणत्त्विक महत्व के बावजूद , निरमा कार्यो के लिए  करेवा की खुदाई की जा रही है। 

👅1995 और 2005 के बिच काजीगुंड-बारामुला रेल लाईन के लिए पुलवामा बडगाम और बारामुला जिलों में करेवा के बड़े हिस्से को मिट्टी के लिए नष्ट कर दिए गया था। 

👅श्रीनगर एयरपोर्ट, बड़गाम में दामोदर करेवा पर बना है। 

👅 6 दिसंबर 2021 को पटट्न गॉव के आस पास करेवा की खुदाई और श्रीनगर रिंग रोड के निर्माण के लिए मिट्टी का उपयोग करने के लिए सहमति दी गई थी। 

👅58 किलो मीटर लंबी इस परियोजनाओ के लिए पुलवामा और बड़गाम जिलों में दो अन्य करेवा भी खोदे जा रहे है 

👅करेवा के विनाश से झेलम जैसी नदिया में गाद जमा हो सकती है जिससे बाढ़ के हालात पैदा हो सकते है 

कश्मीर के अत्यधिक उपजऊ जलोढ़ मिट्टी जिसे करेवा कहा जाता है। इस करेवा मिट्टी खुदाई को विकास के के नाम पर नष्ट किया जा रहा है। जिससे स्थानीय लोगो को काफी खतरा है। 


 राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भवन राष्ट्र को समर्पित। 

👅आज प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का नवनिर्मित भवन राष्ट्र को समर्पित किया। इस यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में एक अहम कदम माना जा रहा है। 

👅 यह यूनिवर्सिटी निजी क्षेत्र के साथ तालमेल विकसित करेगा और पुलिस एवं सुरक्षा से संबंधित विभिन्न क्षेत्रो में उत्कृष्ता केंद्र स्थापित करेगा। 

👅 यह बेहतर सुरक्षा वातावरण और आपराधिक न्याय प्रणाली बनाने में मदद करेगा। 

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय(RRU) 

 👅यह गुजरात में गांधीनगर के पास लवाद गांव में स्थित है।  यह रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय को अपग्रेड करके स्थापित किया गया था जिसे गुजरात सरकार द्वारा 2010 में स्थापित किया गया था और इसने 1 अक्टूबर 2020 से अपना परिचालन शुरू किया। 

►इसका उद्देस अंत: विषय क्षेत्रो में सुरक्षा और रणनीतिक शिक्षा प्रदान करना है। 

►विश्वविद्यालय शांति संवृद्धि और स्थिर विश्व के भारत के दृष्टिकोण में योगदान देता है। 

►राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRD) की स्थापना पुलिस आपराधिक न्याय और सुधारत्मक प्रशासन के विभिन्न अंगो में उच्च गुणवत्ता वाली प्रणाली प्रशिक्षित जनशक्ति की जरूरत को पूरा करने के लिए की गई है। 

►यह विश्वविद्यालय पुलिस विज्ञान और प्रवंध, आपराधिक कानून और अन्य साइबर मनोविज्ञान, आदि जैसे पुलिस और आंतरिक सुरक्षा के वभिन्न क्षेत्रो में शैक्षणिक कार्यक्रम उपलब्ध करता है। 

रूस और यूक्रेन के यूद्ध से लगभग 15 लाख लोग यूक्रेन छोर चुके है। 

लोगो के इस विस्थापन को यूनाइटेड नेशन हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजिग ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे तेजी से बढ़ता हुआ शरणार्थी विस्थापन माना है।  इस  शरणार्थी संकट को ध्यान में रखते हुए यूरोपिये संघ के सदस्यों ने वर्ष  2021 के यूरोपिये यूनियन कौंसिल डेरक्टर या टेम्परोरी प्रोटेक्शन सक्रिय करने फैसला लिया है। 
इससे यूक्रेन से विस्थापित लोगो के लिए एक अस्थायी सुरक्षा तंत्र स्थापित करना है। 


टेम्परोरी पोटेक्सन डायरेक्टिव के तहत विस्थापित लोगो को अस्थायी सुरक्षा देना एक अपवादिक उपाय है।इसका मकसद  गैर यूरोपीय संघ के देशो से विस्थापित उन लोगो को तत्काल और स्थाई सुरक्षा प्रदान करना है। जो संघर्ष के चलते अपने मूल देश में वापस लौटने में असमर्थ है। 

इसके अलावा बहुत बड़ी संख्या में लोगो के विस्थापन से शरणार्थी संकट उत्प्न्न होने पर टेम्परोरी प्रोटेक्शन डाइरेक्टिव को  सक्रिय किया जा रहा है क्यों की  बहुत बड़ी संख्या में लोग के विस्थापन से शरणार्थी संकट उतपन होसकता है। 


इस डायरेक्टिव को सोवियत संघ के विघटन के परिणाम स्वरूप लाया गया गया था। इस विघटन के चलते वर्ष 1990 के दशक में बड़े पैमाने पर सशस्त्र संघर्ष और जातीय संघर्ष हुए इन संघर्षो से बड़ी संख्या में लोगो का विस्थापन हुआ था। 


इस लिए यूरोपिये संघ ने इस वस्थापन से निपटने के लिए टेम्पोरेरी प्रोटक्शन डायरेक्टिव के तहत विशष प्रिकिरियाओ को स्थापित किया था इसके तहत यूरोपिये संघ के सदस्य देशो के द्वारा विस्थापित लोगो को  निम्न अस्थयी सुरक्षाए  देगा। 

👅विस्थापित लोगो को सुरक्षा अवधि तक निवास परमिट देना। 

👅आवास की सुविधा उपलब्ध कराना। 

👅चिकित्क उपचार प्रदान करना। 

👅रोजगार तक पहुंच बढ़ाना आदि। 

BBIN मोटर वाहन समझौते पर बैठक आयोजित। 

बांग्ला देश भूटान , नेपाल BBIN समूह ने मोटर वाहन समझौते से भूटान के अलग रहने के वाबजूद अन्य तीन देशो ने इस समझौते को आघे बढ़ाने के लिए एक बैठक आयोजित की थी. इस बैठक का मकसद तीनो देशो में समझौते को लागु करने के लिए उठाये जाने वाले कदमो पर चर्चा करना था। 

फरवरी 2020 के बाद से मोटर वाहन समझौते पर BBIN समूह के देशो की पहली व्यक्तिगत बैठक थी। हाल ही में हुई इस बैठक में एक MOU के साथ यात्री और वर्गो मूवमेंट पर दो अलग अलग प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया गया। ताकि BBIN समहू के देशो के साथ व्यापारिक people to peeple कनेक्टिविटी बढ़ाने में  महत्व मिले सके। 

इस दौरान BBIN मोटर वाहन समझौते  को लागु करने के लिए भारत बंगला देश और नेपाल द्वारा mou पर दस्खत किये गए लेकिन भूटान द्वारा समझौते का समर्थन किया जाना अभी बाकि है। 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ