भारत का इतिहास।
इतिहास क्या है ?
मानव के बीते हुए कल की कहानी को इतेहसास कहते है। मानव समाज में विभिन्न कालो में तरह तरह के बदलाव हुए है। इतिहास से हमे इन दबलावो का पता चलता है।
इतिहास से हमे बीते हुए कल के राजाओ ,साम्राज्यों और समाज के बारे में पता चलता है। इतिहस से हमे पता चलता है की भूतकाल में लोग कैसे रहते थेा और इतहास हमे ु लोगो के बारे के पेशे के बारे में बतलाता है।
इतहास से हमे अपने पूर्वजो की महान उपलब्धीयो के बारे में पता चलता है। इतिहास से हमे अपने पूर्वजो द्वारा की गई गल्रियो के बारे में पता चलता है। इतहास से हमे यह भी पता चलता है की किसी खास कल में बच्चे किस तरह के खेल खेला करते थे। इतहास से हम सबक लेते है ताकि एक बेहतर भविष्य बना सके। इस इतिहास में निम्नलिखित विषय पर बात करेंगे।
👅उत्तर पच्शिम में स्थित सुलेमान और किरथक पहाड़ियों।
👅पुर्वोत्तर की गारो पहड़िया पर और मध्य भारत की विध्य पहाड़िया।
👅सिंधु और उनकी सहायक नदियों।
👅गंगा और सोन नदिया के किनारे।
👅नर्मदा नहीं के तटये भाग।
नर्मदा नदी।
कई हजारो वर्ष तक लोग नर्मदा नदी के नजदीक रहते थे वह लोग शिकार करते थे या फिर कंद मूल फल इकट्ठा करते थे। ऐसे लोग एक किसी एक स्थान पर नहीं रहते थे ,बल्कि खानाबदोस या बंजारे थे।
सुलेमान और किरथर की पहाड़ी।
इन पहाड़ियों में लोग 8000 वर्ष पहले रहते थे और वह उन पहले लोगो में से थे जिन्होंने खेती की शुरूआत की थी वह गेहूं और जौ की खेती करते थे।
यह लोग भेड़ ,बकरी तथा गाय बैलो को पाला करते थे। यह लोग एक स्थाई जीवन जीते थे यानि एक ही स्थान पर टिक कर रहते थे इसी समय के आस पास गावो का निर्माण होने लगा था।
गारो और विंध्य की पहाड़िया।
गारो की पहाड़ियाँ में रहें वाले लोग उन पहले लोगो में से थे जिन्होंने धान की खेती शुरू की। विध्याचल के उत्तर की तरफ भी धान की खेती होती थी
सिंधु और उसकी सहायक नदिया।
सिंधु और उनकी सहायक नदियों के आस पास आरंभिक शहरों का विकास लगभग 4700 वर्ष पहले हुआ
गंगा और सोन नदी।
गंगा नदी के किनारे पर शहरों का विकाश लगभग 2500 वर्ष पहले शुरू हुआ। कुछ शहर सोन जैसी सहायक नदियों के किनारे भी विकसित हुए और कुछ शहरों का विकास समुंद्री तटों पर भी हुआ।
हमारे देश के कई नाम है।
हमारे देश के कई नाम है जैसे की आर्यवर्त ,जंबूद्वीप,भारतवर्ष, भारत,हिंदुस्तान, आदि। आज़कल इण्डिया, हिंदुस्तान और भारत प्रचलित है। लेकिन हमारे देश के कानून में अनुछेद 1 भारत अर्थात इण्डिया नाम है।
इंडिया
ईरान और ग्रीस के लोग भारत के उत्तर पश्चिम इलाके में आया करते थे इसलिए सिंधु (इंडस) नदी के बारे में जानने लगे वे इस नदी को इंडोस या हिडोस कहते थे। इस तरह से सिंधु नदी के पूर्व की ओर पड़ने वाले इलाको का नाम इंडिया परा।
भारत
भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पच्शिम भाग में रहने वाले लोगो को भरत कहा जाता था। इनका जिक्र ऋग्वेद में किया गया है। इसलिए इस भूभाग का नाम भारत पड़ा।
इतिहास के स्त्रोत।
(1) पांडुलिपी
(2) अभिलेख
(3) सिक्के
(4) पुरातत्व स्थल
(1) पांडुलिपी
हाथ से लिखे हुई किताब को पांडुलिपी कहते है। छपाई (प्रिंटिंग) की तकनीक के अविष्कार से पहले किताबो को हाथो से लिखा जाता था। शुरू की पांडुलिपी को ताड़ के पत्तो या भोजपत्र पर लिखा जाता था। पुराणी पांडुलिपीयो से धार्मिक विश्वसा और रीतियों , राजाओ , दवाइयों विज्ञान, कविताओ, आदि के बारे में प्रचुर जानकारी मिलती है।
(2) अभिलेख
किसी पत्थर पर उकेरे हुए लेख को अभिलेख कहते है। किसी पांडुलिपी की तुलना में अभिलेख बहुत लम्बे समय लिए संरक्षित रह सकता है। ज्यादातर अभिलेखों में किसी राजा की घोषणा या आदेश मिलते है।
ऐसी घोषणाओ को अभिलेखों पर इसलिए लिखवा जाता जाता था ताकि अधिक से अधिक लोग उन्हें पढ़ सके।
कुछ अभिलेखो में राजाओ, व्यापारियों और अन्य लोगो द्वारा किये गए अच्छे कामो के बारे में लिखा जाता था। ऐसे अभीलेख अक्सर संस्कृत या प्राकृतिक या तमिल में लिखे गये थे।
(3) सिक्के
सिक्के पर अक्सर उसे जारी करने वाले राजा की तस्वीर रहती है। इसलिए सिक्के से उस समय के राजा के बारे में पता चलता है। सिक्को से उस ज़माने के कारीगरों की महारत के बारे में पता चलता है। सिक्को की शुरूआत सबसे पहले प्राचीन ग्रीस में 600 ईसा पूर्व हुई थी।
(4) पुरातत्व स्थल
जिस स्थान से ऐतिहासिक अवशेष मिलते है इसे पुरात्वत स्थल कहते है। भवन और स्मारक भी पुरातत्व स्थिल की श्रेनी में आते है। ऐसे स्थलों से मिलने वाले पुरवेशष और अन्य वस्तुओ से बीते जमाने के बारे में प्रचुर जानकारी मिलती है। पुरावशेषो के अध्ययन के विशेषज्ञ को पुरातत्ववादी कहते है।
तारीख का मतलब।
तारीखों की मदद से हमे घटनओ को एक साथ क्रम में रखने में सहूलियत होती है। इसलिए इतिहस का अध्ययं करते समय तारीखों का बहुत महत्व होता है। इतिहास के बारे में चर्चा करते हुए तारीखों की BC (ई० पू) और AD ईस्वी का इस्तेमाल होता है।
BC का मतलब होता है ईसा से पहले। और AD का मतलब होता है Anno Domini यानि ईश्वर के साल में। कभी कभी AD की जहग CE(कॉमन एरा) का भी इस्तेमाल होता है। इसी तरह BC की जहग BCE का इस्तेमाल होता है।
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