जैसा की हम जानते है जिला कलेक्टर भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक प्रमुख प्रसासनिक पद है एक जिला कटेक्टर डिस्टिक कलेक्टर या फिर सिर्फ कलेक्टर के नाम से भी जाना जाता है भारत के प्रत्येक जिले का एक अपना उपयुक्त होता है। जिलाधीश और कलेक्टर के रूप में जिले में राज्य सरकार का सर्वोच्च अधिकार संपन्न प्रतिनिधि या प्रथम लोक सेवक होता है।
एक जिला कलेक्टर सरकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होने के नाते आम जनता के साथ सीधे सम्पर्क के होता है। इस लिए उनकी जिम्मेदारियां भी काफी बड़ी होती है। जैसे नागरिक प्रशासन ,विकास ,पंचायत ,स्थानीय निकायों ,आदि के क्षेत्र में कई कार्य करना जिला कलेक्टर के अधीन होता है। जहां एक जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी है की वह अपने क्षेत्र में कानून व्यवस्था को बनाये रखे वही एक कलेक्टर की यह भी जिम्मेदारी है की वह आम जन्ता की समस्या का निदान करे और सरकारी योजनाओ को लोगो तक पहचाए। जिला के विकास के लिए कलक्टर को बजट भी मिलता है।
एक कलेक्टर को अपने जिले के विकास के लिए कौन कौन से बजट मिलता है?
जिला कलेक्टर को जिला के विकास के लिए केंद्र सरकार की योजनाए राज्य सरकार की योजनाए जो भी उस जिले में चलेगी वह फंड के रूप में जिला अधिकारी को मिलता है। विधायक और संसद की योजनाए भी जिला कलेक्टर को ही संचलित होती है। और एक बात जिला कलेक्टर को जिला के विकास के लिए अलग से कोई पैसा नहीं मिलता है।
विधायक और संसद को मिलने वाली राशि जिन्हे जिला कलेक्टर संचलित करता है इस प्रकार है।
संसद निधि योजना
संसद निधि योजना केंद्र सरकार द्वारा चलायी गयी योजना है जिसमे सांसदों ो अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए प्रतिवर्ष वितय सहायता दी जाती है यह राशी करोड़ो में होती है। और यह राशि होती तो है संसद की लेकिन इन योजनाओ की राशि संसद के खाते में नहीं भेजी जाती है बल्कि यह राशि संबंधित जिले के कलेक्टर के खाते में दो किस्तों में भेजी जाती है। संसद जिलाधिकारी को बताता है की उसे जिले में कहा कहा उपयोग करना है।
MPLAD योजना
इस योजना की धनराशि लोकसभा सांसदों को अपने चुनाव क्षेत्र में कही भी और राज्यसभा सांसदों को अपने राज्य में कही भी विकास कार्य करने के लिए दिए जाते है। संसद सदस्य जिस जिले को नोडल जिले के रूप में चुनता है इसकी सुचना संख्यिकी और कार्क्रम मंत्रलय के साथ साथ राज्य सरकार और उस जिले के जिलाधिकारी को देनी होती है। यह राशि भी जिला कलेक्टर के ही खाते में आती है जिसे वह जिले के विकास के ख़र्च करता है। कुछ समय से सरकार इस योजना में दी जाने वाली राशि को ख़र्च करने की जिम्मेदारी किसी और अधिकारी को सौपने पर विचार कर रही है ,क्योकि जिलाधिकारी कई अन्य कामो में व्यस्त रहते है इस कारण कई बार MPLAD का फंड तय समय में खर्च नहीं हो पाता है।
इस योजना के तहत जिले के प्रत्येक कलेक्टर को 3 करोड़ रुपये मिलते है जो उनके पास हमेसा रहता है। इन पैसो का उपयोग आपातकालीन कार्यो,और महत्वपूर्ण या आवश्यक कार्यो पर ख़र्च के लिए एक जिला कलेक्टर दिया जाता है। इससे एक जिला कलेक्टर को विधायकों और मंत्रियो के सामान वित्तीय स्थिति प्राप्त होती है। राज्य सरकार निर्वाचन क्षेत्र विकास कोष के तहत प्रत्येक विधायक और मंत्री को प्रति वर्ष 3 करोड़ रुपये प्रति वर्ष देती है।
मुख्यमंत्री सीएमआरएफ निधि
कैशलेस लेनदेन
कुछ योजनाए कुछ विशेष जिलों में ही चलाई जाती है। उनका पैसा सिर्फ उसी जिले को प्राप्त होगा। और कई तरह के फंड सभी जिले को प्राप्त होते है। सभी फंड जिस प्रोयोजना के लिए होते है उन्हें पर खर्च करने परते है और कछ फंड ऐसे होते है जिनको एक कलेक्टर अपनी समझ से ख़र्च करने का वेशसधिकार रकते है।
एक IAS अधिकारी को कलेक्टर क्यों कहा जाता है?
एक सिविल सर्विसेस की तैयारी करने वाले लगभग हर एक विद्यार्थी का सपना होता हे तथा IAS एक पदवी होती हे जिसके अंतर्गत कलेक्टर का पद होता हे ऐसा जरुरी नहीं की हर IAS अधिकारी कलेक्टर हो परन्तु यह जरूर होता हे प्रत्येक कलेक्टर एक IAS अधिकारी होता हे
IAS एक पदवी होती हे जिसके अन्तर्गत कलेक्टर , सचिव , केबिनेट सचिव , मुख्य सचिव , आयुक्त , सीईओ जैसे भारत सरकार के महतवपूर्ण पद होते हे.
जबकि कलेक्टर एक पोस्ट होती हे कलेक्टर यानी जिले की संबंधित सभी कर को जमा करके केंद्र तथा राज्य सरकारों को भेजना। तथा जिला स्तर की कोई भी जानकारी वह कलेक्ट करके केंद्र तथा राज्य सरकारों को भेजते हैं।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट हे की कलेक्टर एवं IAS दो अलग अलग
पोस्ट हे
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