एक कलेक्टर को अपने जिले के विकास के लिए कितना बजट मिलता है-ek kalektar ko apane jile ke vikaas ke lie kitana bajat milata hai2021?

 जैसा की हम जानते है जिला कलेक्टर भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक प्रमुख प्रसासनिक पद है एक जिला कटेक्टर डिस्टिक कलेक्टर या फिर सिर्फ कलेक्टर के नाम से भी जाना जाता है भारत के प्रत्येक जिले का एक अपना उपयुक्त होता है। जिलाधीश और कलेक्टर के रूप में जिले में राज्य सरकार का सर्वोच्च अधिकार संपन्न प्रतिनिधि या प्रथम लोक सेवक होता है। 


एक जिला कलेक्टर सरकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होने के नाते आम जनता के साथ सीधे सम्पर्क के होता है। इस लिए उनकी जिम्मेदारियां भी काफी बड़ी होती है। जैसे नागरिक प्रशासन ,विकास ,पंचायत ,स्थानीय निकायों ,आदि के क्षेत्र में कई कार्य करना जिला कलेक्टर के अधीन होता है। जहां एक जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी है की वह अपने क्षेत्र में कानून व्यवस्था को बनाये रखे वही एक कलेक्टर की यह भी जिम्मेदारी है की वह आम जन्ता की समस्या का निदान करे और सरकारी योजनाओ को लोगो तक पहचाए। जिला के विकास के लिए कलक्टर को बजट भी मिलता है। 


एक कलेक्टर को अपने जिले के विकास के लिए कौन कौन से बजट मिलता है?

जिला कलेक्टर को जिला के विकास के लिए केंद्र सरकार की योजनाए राज्य सरकार की योजनाए जो भी उस जिले में चलेगी वह फंड के रूप में जिला अधिकारी को मिलता है। विधायक और संसद की योजनाए भी जिला कलेक्टर को ही संचलित होती है। और एक बात जिला कलेक्टर को जिला के विकास के लिए अलग से कोई पैसा नहीं मिलता है। 


विधायक और संसद को मिलने वाली राशि जिन्हे जिला कलेक्टर संचलित करता है इस प्रकार है। 


संसद निधि योजना

संसद निधि योजना केंद्र सरकार द्वारा चलायी गयी योजना है जिसमे सांसदों ो अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए प्रतिवर्ष वितय सहायता दी जाती है यह राशी करोड़ो में होती है। और यह राशि होती तो है संसद की लेकिन इन योजनाओ की राशि संसद के खाते में नहीं भेजी जाती है बल्कि यह राशि संबंधित जिले के कलेक्टर के खाते में दो किस्तों में भेजी जाती है। संसद जिलाधिकारी को बताता है की उसे जिले में कहा कहा उपयोग करना है। 


MPLAD योजना 

इस योजना की धनराशि लोकसभा सांसदों को अपने चुनाव क्षेत्र में कही भी और राज्यसभा सांसदों को अपने राज्य में कही भी विकास कार्य करने के  लिए दिए जाते है।  संसद सदस्य जिस जिले को नोडल जिले के रूप में चुनता है  इसकी सुचना संख्यिकी और कार्क्रम मंत्रलय के साथ साथ राज्य सरकार और उस जिले के जिलाधिकारी को देनी होती है। यह राशि भी जिला कलेक्टर के ही खाते में आती है जिसे वह जिले के विकास के ख़र्च करता है। कुछ समय से सरकार इस योजना में दी जाने वाली राशि को ख़र्च करने की जिम्मेदारी किसी और अधिकारी को सौपने पर विचार कर  रही है ,क्योकि जिलाधिकारी कई अन्य कामो में व्यस्त रहते है इस कारण कई बार MPLAD का फंड तय समय में खर्च नहीं हो पाता है। 

जिला विकास योजना 

इस योजना के तहत जिले के प्रत्येक कलेक्टर को 3 करोड़ रुपये मिलते है जो उनके पास हमेसा रहता है। इन पैसो का उपयोग आपातकालीन कार्यो,और महत्वपूर्ण या आवश्यक कार्यो पर ख़र्च  के लिए एक जिला कलेक्टर दिया जाता है। इससे एक जिला कलेक्टर को विधायकों और मंत्रियो के सामान वित्तीय स्थिति प्राप्त होती है। राज्य सरकार निर्वाचन क्षेत्र विकास कोष के तहत प्रत्येक विधायक और मंत्री को प्रति वर्ष 3 करोड़ रुपये प्रति वर्ष देती है। 


मुख्यमंत्री सीएमआरएफ निधि 

इस योजना के तहत जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री राहत कोष के बेहतर उपयोग के लिए राशि भेजी जाती है। इस राशि को कलेक्टर उद्देश्य पात्र व्यकितयों को उनकी आवश्यकता के समय तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए देते है। वर्ष 2014 - 15 के दौरान कलेक्टरों ने अपने पास उपलब्ध सीएमआरएफ निधि में से पात्र व्यक्तियों को 5,24,29,728/- रुपये 8067 वितरित किए।


कैशलेस लेनदेन 

इस योजना के तहत केंद्र सरकार कैशलेस अभियान शुरू करने के लिए सीधे जिला कलेक्टरों को राशि  भेजती है। कैशलेस इकनॉमी बनाने में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने डिजिटल ट्रांजेक्शन पर कई फायदे की घोषणा की है.कार्ड ट्रांजेक्शन पर सरकार ने हाल में 2000 रूपये तक के पेमेंट को सर्विस टैक्स से फ्री कर दिया है. यह डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है. 

कार्ड से पेट्रोल खरीदने पर 0 .75 फीसदी छूट, रेल टिकट, हाइवे पर टोल, बीमा खरीदने जैसे कई छूट की घोषणा की गयी है.कार्ड से पेट्रोल खरीदने पर 0 .75 फीसदी छूट, रेल टिकट, हाइवे पर टोल, बीमा खरीदने जैसे कई छूट की घोषणा की गयी है.

'अगर सभी लेन-देन का हिसाब रखा जा रहा है तो आपके लिए खर्च पर काबू पाना आसान हो जाता है. यह आपको इनकम टैक्स रिटर्न में भी मदद करेगा आप इ वालेट या कार्ड से ट्रांजेक्शन करते हैं तो यह स्टेटमेंट के रूप में आपके पास रहेगा. इससे आप अपने खर्च पर लगाम लगा सकते हैं. जब आप खर्च पर काबू पा लेंगे तो आपकी बचत बढ़ जाएगी।

कुछ योजनाए कुछ विशेष जिलों में ही चलाई जाती है। उनका पैसा सिर्फ उसी जिले को प्राप्त होगा। और कई तरह के फंड सभी जिले को प्राप्त होते है। सभी फंड जिस प्रोयोजना के लिए होते है उन्हें पर खर्च करने परते है और कछ फंड ऐसे होते है जिनको एक कलेक्टर अपनी समझ से ख़र्च करने का वेशसधिकार रकते है। 


 एक IAS अधिकारी को कलेक्टर क्यों कहा जाता है?

एक सिविल सर्विसेस की तैयारी करने वाले लगभग हर एक विद्यार्थी का सपना होता हे तथा IAS एक पदवी होती हे जिसके अंतर्गत कलेक्टर का पद होता हे ऐसा जरुरी नहीं की हर IAS अधिकारी कलेक्टर हो परन्तु यह जरूर होता हे प्रत्येक कलेक्टर एक IAS अधिकारी होता हे 

IAS एक पदवी होती हे जिसके अन्तर्गत कलेक्टर , सचिव , केबिनेट सचिव , मुख्य सचिव , आयुक्त , सीईओ जैसे भारत सरकार के महतवपूर्ण पद होते हे. 


जबकि कलेक्टर एक पोस्ट होती हे कलेक्टर यानी जिले की संबंधित सभी कर को जमा करके केंद्र तथा राज्य सरकारों को भेजना। तथा जिला स्तर की कोई भी जानकारी वह कलेक्ट करके केंद्र तथा राज्य सरकारों को भेजते हैं।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट हे की कलेक्टर एवं IAS दो अलग अलग पोस्ट हे


कलेक्टर और MP/MLA में कौन सबसे ज्यादा पावरफुल है?

सबसे पहले हम बात करते है की MLA का फुल फॉर्म क्या होता है. MLA का फुल फार्म होता है मेंबर ऑफ़ लेजिस्लेटिव असेंबली जिसे हम विधाक कहते है अब बात करते है MP की MP का फुल फॉर्म होता है मेम्बर ऑफ़ पार्लियामेंट जिसे हम संसद के सदस्य कहते है। 

अब हम बात करते है एक आईएएस ऑफिसर जो किसी डिस्टिक में कलेक्टर के रूप में काम करता है और साथ में उसी डिस्टिक में कार रहे MLA /MP की , हम बात करेगे की MLA /MP और कलेक्टर के बिच अंतर की एक आईएएस ऑफिसर जोकि कलेक्टर के रूप में काम कर रहा है और एक MP  यह दोनों आते कहा से है। किस टाइप से चुने जाते है। 


एक आईएएस ऑफिसर upsc एग्जाम क्वालिफाइड कर के  और फिर उसके बाद एक अच्छी रैंकिंग लाकर एक आईएएस ऑफिसर बनते है फिर उन्हें पोस्टिंग मिलती है कलेक्टर की या फिर PCS एग्जाम क्वालिफाइड कर के sdm बनते है फिर कुछ साल काम करके  प्रमोट होते है फिर प्रमोशन पाकर आईएएस ऑफिसर बनते है  एक आईएएस ऑफिसर को कड़ी ट्रेनिंग भी मिलती है.

वही बात की जय MLA या MP तो इन्हे कोई एग्जाम नहीं देनी प्रति है और नाही इनकी कोई ट्रेनिंग होती है। 

 MLA या MP  जनता के दुवारा चुने जाते है और जनता के ही प्रतिनिधि होते है। 

एक आईएएस ऑफिसर जो डिस्टिक क्लोक्टर के रूप में काम कर रहे होते है तो अपने क्षेत्र में यानि जहा वह काम कर रहे है उस क्षेत्र के अंदर जो पावर यूज करते है वह IPC सिविल एसेट के तहत मिलती है और उसी पावर को फ्लो करके अपना काम पूरा करते है। 

और वही पर MLA या MP को काम करने के लिए जो पावर दी गई है वह किसी IPC या CRPC के तहत नहीं दी गई है  यह जो पावर यूज करते है वह इन्हे भारताये संविधान से मिली होती है। 


कौन ज्यादा पावरफुल है संवैधानिक रूप में ?

एक आईएएस ऑफिसर को यह पावर दी जाती है जब वह एक कलेक्टर के रूप में काम कर होते है तो उनके पास निरीक्षण करने का समीक्षा करने का डिसीजन लेने का साथ ही करवाई का अधिकार होता है। अगर किसी डिस्टिक में MLA या MP के दोवारा कोई गैरकानूनी काम की जा रही हो तो कलेक्टर की जिम्मेदारी है की वह उसपर कार्रवाई करे। 

एक  MLA या MP को यह अधिकार होता है की अपनर अधिकार क्षेत्र अंतर्गत काम कर रहे जितने ऑफिसर काम क्र रहे होते है उनके काम का  निरीक्षण कर  सकते है अगर कोई ऑफिसर के दोवारा कई गैरकानूनी काम किया जा रहा हो तो फिर वह सीनयर अधिकारी को आदेश दे सकते है की वह उन पर कार्रवाई  करने का। 


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